मेरे रंज-ओ-ग़म की कीमत
भले ही हँंसी के बाजार में ग़म हास्यप्रद हो, पर जिसने इस वक्त में सब्र रख लिया, समझो उसने वक्त को जीत लिया।
Literature
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16
Mar
2025 11:26 PM
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