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सामंथा (भाग 4)

हर सिक्के के दो पहलू होते है, अक्सर जो पहलू हम देख पाते है वैसी ही अवधारणा मन में बना लेते हैं, अक्सर सच दिखने वाला हर सच झूठ की एक मोटी परत अपने अंदर समाए रहता है जो वक्त के साथ सामने वाले को नज़र आने लगती है।

Literature

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01
Oct
2025 10:46 PM

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               सामंथा (भाग 4)