अमावस की चांदनी
यूँ तो कहीं आस्मां मेरा जैसा ना होगा यूँ तो कोई अब्र बिन चाँद का ना होगा गर होगा भी अँधेरी रात अमावस का यूँ तो मगर मेरे जैसा चांदनी को ना तरसता होगा
Literature
•
16
Jun
2025 1:16 PM
•