"अन्तरआत्मा की कहानी, एक मां की ज़ुबानी"...मंजूषा कुमारी

मुझसे पूछे कौन मेरा नाम, अब मैं बस "माँ" कहलाती हूँ, पर इस नाम के हर अक्षर में, अपनी हस्ती पाती हूँ। कभी ग़लती भी हो जाती है, दिल में डर सा छा जाता है, 

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26
May
2025 9:07 PM


"अन्तरआत्मा की कहानी, एक मां की ज़ुबानी"...मंजूषा कुमारी