"बरसात की बूंदों में मेरी कहानी"(मंजूषा कुमारी )
बरसात की पहली बूंद गिरी, जैसे बचपन फिर से जी उठा। कागज़ की नावें, मिट्टी की ख़ुशबू, हर स्मृति में जीवन सी उठी।
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25
Jun
2025 5:31 PM
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