'बेतौल' ग़ज़ल 

एक भरोसे पे ‘बेतौल’ तेजाब-ओ- अजाब पी रहे, वो भरोसे और फैसले के नाम को शर्मिंदगी दे गया।

Literature

27
Apr
2024 4:13 PM


'बेतौल' ग़ज़ल