मां तेरी यादों संग..... ----------------- जाते जाते नसीहतें देती रही, तुम सबकी चिंता करती रही। तुम्हारे चले जाने के बाद भी, हम तेरी प्रतीक्षा करते रहें हैं। चांद सितारों से हम अक्सर, ज़िक्र तुम्हारा ही करते रहें हैं। तुम्हारी स्मृतियां संग हैं जरूर, लेकिन मां बहुत अकेलापन है। तेरे स्पर्श के जैसा सुख हमको, जीवन में फिर कभी मिला नहीं। अब कोई कुछ कह देता है पर, हमें किसी से कोई गिला नहीं। मां अब शिकायतें करते नहीं हैं, अब मेरी जिद खत्म हो गई है। जीवन के घनघोर अंधेरे में भी, हम यादों संग चलते जा रहे हैं, मां सबकी सब सुनते जा रहे हैं, दुख में भी हम हंसते जा रहे हैं। भारतेन्द्र कुमार त्रिपाठी शिक्षक प्रयागराज
कविता
Literature
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May 2024 2:27 PM
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