रुख़्सत

यह ग़ज़ल विदाई, दर्द और बीते रिश्तों की कसक को खूबसूरती से बयां करती है। इसकी आखिरी पंक्तियों में जीवन और मृत्यु की तुलना एक विवाह से की गई है।

Personal

22
Feb
2025 12:06 AM


रुख़्सत