तीन कविताएं
मुझे याद ही नहीं मालूम है बंधे है हम सामाजिक बंदिशों में सपने है कुछ मेरे तो सजाये है पलकों पर तुमने भी कुछ ख्वाब
Literature
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28
Apr
2024 11:06 PM
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