तीर्थ

अंधकार घना जब छाए, जी बहुत घबराता, मिलता है जब धोखा, मिला हुआ छूट जाता, बेआवाज अकेले रोता हूं, थोड़ा सा पछताता हूं, फिर शांति की तलाश में, गुहारता चिल्लाता हूं। तब मैं अपने मन का तीरथ कर आता हूं.....

Literature

12
May
2024 11:00 AM


तीर्थ