थक सा गया हूं अब थोड़ा आराम चाहता हूँ
दिल करता है तेरी गोद में सर रखकर ...... अपने मन के सारे बोझ उतार कर आज़ाद हो जाऊं थक सा गया हूं अब थोड़ा आराम चाहता हूँ ..... बिना कोई सवाल किए तुम्हारी गोद में सर रखकर ..... कुछ पल को चैन से सो लू जब आँखे खुले तो तुम नई सुबह की किरणों की तरह मेरे सामने मिलो मुझसे ....... और अपने बाजुओं को फैलाकर हमेशा के लिए समेट लो खुद में मुझको तुम्हारी हथेलियों को थामे ..... इस धरती की सबसे खूबसूरत जगहों पर जाऊ़़ँ किसी घाट किनारे घण्टो तुम सँग चुपचाप से बैठा रहूँ ...... इस धरा से उस जहाँ तक तुम्हारा साथ चाहता हूँ हाँ थक गया हूंँ तेरे प्रेम की ठंडी छाँव में ...... आराम चाहता हूं। जुगेन्द्र सिंह विद्यार्थी
Literature
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Mar 2024 11:19 PM
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